अध्याय 166: वेब लॉग

रात उतर चुकी थी।

शार्लेट बिस्तर पर लेटी करवटें बदल रही थी, होंठों के किनारों पर हल्की-सी मुस्कान खिंची चली आ रही थी।

उसने आँखें बंद कीं, सोने की कोशिश की, मगर जेम्स का चेहरा बार-बार उसके ज़हन में उभर आता।

आख़िरकार शार्लेट ने गहरी साँस ली, बिस्तर से उठी और खिड़की के पास जाकर बाहर चाँद को देखने लगी...

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